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सोमवार, 11 मई 2009

कालसर्प योग निवारण पाठ

जब जन्म कुंडली में सारे ग्रह राहू और केतु के बीच में होते है तब कालसर्प योग होता है .और अगर राहू और केतु के साथ किसी ग्रह की युति हो तो जातक को उस भाव अनुसार कष्टों का सामना करना पडता है इसलिए मायूस न हो कालसर्प योग से पेरशान हर जातक कालसर्प योग निवारण पाठ को पढ़ अपने मानसिक, शारीरिक ,आर्थिक,कष्टो से छुटकारा पा सकता है ।

अथः सर्प सूकत पाठ

अनन्त कालसर्प योग नाशाय विषधरं धराय च नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
कुलिक कालसर्प योग नाशाय हलाहल पानाय च नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महा देवाय च नमो नमः।
वासुकि कालसर्प योग नाशाय विषहरणाय च नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
शंखपाल कालसर्पयोग नाशाय महाकाल कालाय च नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
पदम नाम कालसर्प योग नाशाय महाकाल कूटाय च नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
पदम् नाभ कालसर्प योग नाशाय महाभय हरणाय च नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
तक्षक कालसर्प योग नाशाय महाडंस दमनाय च नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
ककोर्टक सर्पयोग नाशाय विष कष्ट हरणाय च नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
शंखनाद सर्प योग नाशाय विष पीडा निवारणाय च नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
पातक काल सर्प योग नाशय दाह दुख भंजनाय च नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
विषाक्त काल सर्प योग नाशाय विष दोष दमनाय च नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
नमस्ते शेषनाग नागाय काल सर्प योग नाशकाय नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
नमस्ते बुधन्य सुनागाय कालसर्प योग नाशकाय नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
नमस्ते नन्दसार नव नागाय कालसर्प योग नाशकाय नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
नमस्ते अश्वतरी नागाय काल सर्प योग नाशकाय नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
नमस्ते कंवल कल नागाय काल सर्प योग नाशकाय नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
नमस्ते नरेन्द्र नाग नागाय काल सर्प योग नाशकाय नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
नमस्ते वज्रदंष्ट्र नागाय काल सर्प योग नाशकाय नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
नमस्ते हेममाली नागाय काल सर्प योग नाशकाय नमः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
ब्रह्म लोकेषु ये सर्पा शेष नागादि पुरोगमा।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
ऋषि लोकेषु ये सर्पा वासुक्यादि प्रमुखादया।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
देवेन्द्र लोकेषु ये सर्पा कद्रुकादि मातृ भक्ति युता।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
असुर लोकेषु ये सर्पा तक्षकादि क्रोध संभविता।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
सत्य लोकेषु च ये सर्पा सुबुध्न्यादि शान्तिप्रिय सर्वदा।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
यम लोकेषु च ये सर्पा ककोर्टकादि अपराधिना दण्डिता।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
वरुण लोकेषु च ये सर्पा अनन्तादि च जल चरा।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
गन्धर्व लोकेषु च ये सर्पा हेममाल्यादि चसु सुगन्धिता।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
ॐ भूः लोक लोकेषु ये सर्पा कालीयादि यमी कुन्ड वासिनाः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
ॐ भुव लोक लोकेषु ये सर्पा शंख पालादि भुजंग बलाः।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।
ॐ स्वः लोक लोकेषु ये सर्पा पदम नाभादि नभ गामिना:।
नमो नीलाय नील कंठाय महादेवाय च नमो नमः।।

इति नील ग्रीवाय नमो नमः।

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