पृष्ठ

LATEST:


विजेट आपके ब्लॉग पर

गुरुवार, 5 अगस्त 2010

ज्योतिष


ज्योतिष वेदांग के छः भागों का एक अंग है । पहले महाऋर्षिगण नि:स्वार्थ रुप से लोगों की भलाई के लिए इस विद्या का उपयोग करते थे लेकिन आज ये केवल व्यवसाय का रुप बनती जा रही है ।मैं भी ज्योतिष की विद्यार्थी हूँ क्योकि यह विद्या अथाह सागर का भंडार है।मेरे अपने तर्क से कोई भी इस में परिपूर्ण नहीं है। जितनी बार इसे हम पढ्ते है नया से नया ज्ञान प्राप्त होता है। आज इस पर शोध करने की आवश्कता है ताकि लोगों मे पल रहे इस के प्रति अज्ञान व अंधविश्वास को दूर किया जा सके ।पहले के महाऋर्षियों के पास दिव्यदृ्ष्टि होती थी जो अपनी सूक्ष्म दृ्र्ष्टि द्धारा भूत, भविष्य का ज्ञान प्राप्त कर लिया करते थे ।जातक की कुंडली को देखकर उस के भविष्य में घटित होने वाली शुभ अशुभ घटनाओं को देखा जा सकता है, न कि इसे टाला जा सके ।ज्योतिष के माघ्यम से हम उस के भविष्य की बुरी घट्ना को टालने की विधियां जरुर बता सकते है लेकिन उसे सम्पूर्ण रुप से नष्ट नहीं कर सकते है।प्रारब्ध कर्म तो उसे भोगना ही पड्ता है। हमारा जीवन जब दुखी होता है तो उसे सुखी बनाने के लिए ज्योतिषी के पास जाते है लेकिन ज्योतिषी कोई भगवान नहीं है ! ऎसा ही एक किस्सा सुनाती हूँ । एक महिला मेरे पास किसी की शादी के सिलासले मे आई । कहने लगी कि बहुत पंडितो को देखा दिया है सभी कहते है कि शादी का योग तो चल रहा है लेकिन फिर भी पता नही क्यों इसकी शादी नही हो रही है आप ऎसा कुछ उपाय बताएँ कि थोडे ही दिनों में इस की शादी हो जाएँ । मैने उस की कुंडली को देखा और कहा कि कल बताऊंगी क्योंकि मैं इतनी जल्दी इस का उत्तर नही देना चाहती थी । आखिर इतने पंडितों से पूछ कर जो मेरे पास आई थी! तो उस कुडंली का गंभीर विश्लेषण मेरे लिए जरुरी था । कल फिर वह महिला आई मैने उसे कहा कि अभी इसका विवाह का योग नही है । तीन साल के बाद विवाह होगा । अब वह कहने लगी कि कोई पूजा,दान,से बात नही बन सकती । अब हार कर मैने कुछ उपाय बता दिएं और कहा कि इन उपायों को वह कर लेती है तो उसके बाद जब लड्का देखने जाएं तो मुझे जरुर बता देना उस समय जो बताऊंगी फिर वह कर लेना ।प्रकृति के आगे इंसान का कोई बस नहीं चलता यही हुआ वह लडकी उन उपायो को नही कर पाई ।तीन चार महीने बाद उन उपायो को वह कर पाई । अब क्या था दो महीने के बाद उस ने बताया कि दो दिन बाद हम लडका देखने जा रहे क्या बात बन जाएंगी ? मैने कहा ठीक है जब लडका देख लोगे अगर पंसन्द आये तो मुझे फोन कर देना मै एक उपाय उसी समय करने को कहूंगी वह कर लिया तो रिश्ता पक्का समझना । अचानक मुझे पता चला कि गुरु जी ने दो दिन साधना की शिक्षा देनी है । मै चली गई । अब कक्षा में मोबाइल बंद रखना पडता है तो उसका मुझसे संपर्क न हो पाया । बाद मे पता चला कि उस ने हमे काफ़ी फोन किया था और उस ने बताया कि लड्का अच्छा था हमे पंसन्द था उन की तरफ से हां ही लग रही थी पर न जाने क्या हुआ कि उन का बाद मे फोन आया कि हमे ये रिश्ता नही करना ।वास्तव मे प्रकृति के आगे किसी का बस नही है । संचित और प्रारब्ध कर्मो का फल जातक को अपने इस जीवन में भोगना ही पड्ता है । थोडे बहुत उपायों द्धारा उसे हम कम कर सकते है लेकिन मिटाना किसी भी ज्योतिषी के हाथ में नही इसलिए मैंने पहले जो कहा कि इस पर शोध की आवश्यकता है उस के लिए निःस्वार्थ आगे आने की जरुरत है । वैसे तो संगीता जी, पंडित शर्मा जी का प्रयास भी प्रशंसनीय है । लेकिन औरो को भी आगे आना चाहिए ताकि इस शास्त्र की उन्नति हो सके और जो अपने स्वार्थ वश इस विद्या को कंलकित कर रहे है,उन से इसे बचाया जा सके। इस शास्त्र के गौरव की रक्षा के लिए अनुसन्धान कार्य में सरकार को भी मदद करनी चाहिए ।


चित्र गुगल सर्च इंजन से साभार

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails