शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

सूर्यग्रहण


आज मौनी अमावस्या है और साथ मे महाकुम्भ का अवसर भी है,तथा सूर्य ग्रहण भी है । आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है।सच पूछा जाए तो आज के दिन इंसान् अगर अपने आप को पहचानने की कोशिश करे तो वह इसमे कायम हो सकता है ।जीवन और मृ्त्यु के चक्र मे आत्मा कब आ फंसती है,आत्मा की पूर्णा अवस्था क्या है ।ऎसे ही अनेको प्रश्न हर इंसान के दिमाग मे होते है।जिसे वह जानना चाहता है।आज के शुभ दिन द्धारा हम इसे जान सकते है यानि प्रभु की उपासना से । हमारी आत्मा अपने आप मे पूर्ण नही है, खंडित है,अपने आप मे टूटी हुई है।माया के कारण हम यह जान नही पाते है।वास्तव मे आत्मा दो खंडो मे विभाजित है।एक खंड स्त्री तत्व और दूसरा पुरुष तत्व है।प्रकृ्ति के इस वातावरण मे ये दोनो खंड अलग अलग हो गये है।हमे आत्मा के दूसरे खंड को जानने की कोशिश करनी चाहिए ।इस के लिए आज का दिन बहुत उत्तम है। सूर्यग्रहण के दौरान अपनी आंतिरक ऊर्जा का विकास करे ।समय की कमी के कारण बाकि चर्चा फिर करुंगी ।

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