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सोमवार, 20 अगस्त 2018

उत्तर दिशा में क्यों नहीं सोए?




प्रकृति मे अनन्त शक्ति विद्यमान है।उस में से एक चुम्बकीय शक्ति भी है। ग्रह, नक्षत्र, तारे एक दूसरे से चुम्बकीय तरंगों से जुड़े हुए हैं। चुम्बक के आकर्षण और विकर्षक से ही यह पूरा ब्रह्मांड गतिशील है। हमारे शरीर से निकलने वाली ऊर्जा इन चुम्बकीय तरंगों से प्रभावित होती है।पृथ्वी के दो ध्रुव - उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिण ध्रुव के बीच इन चुम्बकीय तरंगों का प्रवाह होता रहता है।  हमारे शरीर पर इन तरंगों का सकारात्मक प्रभाव पडे, इसके लिए हमें सोने के लिए सही दिशा का ज्ञान होना चाहिए क्योंकि सोते समय हम पृथ्वी की चुम्बकीय शक्ति से जुड जाते हैं। उत्तर दिशा में सिर रखकर सोने से हमारे शरीर में रक्त के प्रवाह पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। जिस से हम सुबह तरो ताजा नहीं रह पाते। बार-बार उत्तर दिशा में सिर रखकर सोने से हमे सिर दर्द, रक्त की कमी, तथा अन्य मस्तिष्क संबंधी बीमारियाँ भी हो सकती है। ह्रदय संबंधित रोग भी हो सकते हैं। हमारी शारीरिक ऊर्जा धीरे धीरे कम होती जाती है क्योंकि विपरीत चुम्बकीय खिंचाव आपके दिमाग पर दबाव डालेगा, जिससे शरीर सुस्त और आप की नाड़ी की गति धीमी हो सकती है। अगर आप की उम्र ज्यादा है तो लगातार इस दिशा में सोने से लकवा भी हो सकता है। अतः  पृथ्वी की सकारात्मक तरंगो का प्रभाव सोते समय हमारे शरीर पर पडे तथा शरीर स्वस्थ रहें, उस के लिए हमें उत्तर  दिशा में सिर रखकर नहीं सोना चाहिए। पूर्व दिशा में सिर रखकर सोने से  सात्विक तरंगे हमारे ब्रह्मरंध द्वारा हमारे शरीर में पहुंच कर हमें शारीरिक शक्ति तथा कुंडलिनी खोलने मे सहायक होती है इसलिए जो आध्यात्मिक ऊर्जा को बढाना चाहते हैं उन्हें पूर्व दिशा की ओर सोना चाहिए। पढने वाले बच्चों को भी इस दिशा में सोना चाहिए ताकि उनके मस्तिष्क का पूर्ण विकास हो पाए। दक्षिण दिशा में सोना उन लोगों के लिए लाभदायक होता है जिन्हें मानसिक तनाव ज्यादा रहता है। जिन बच्चों की लम्बाई अपनी उम्र के हिसाब से नहीं बढ़ रही हो उन्हें भी दक्षिण दिशा में सिर रखकर सोना चाहिए।


चित्र गूगल साभार 

3 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा अति सुंदर साफ सरल शब्दों में बताने का धन्यवाद ।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (22-08-2018) को "नेता बन जाओगे प्यारे" (चर्चा अंक-3071) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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