जब हम कोई एक नंबर बार-बार देखते हैं तो यह एक संकेत होता है कि परमात्मा हमें एक संकेत दे रहे हैं ।यह नंबर हमें चाहे घड़ी में हो या रास्ते में हो कहीं भी किसी तरीके से बार-बार दिखता है तो हमें उस संकेत को समझना चाहिए। अगर हम 12:34 नंबर बार-बार देखते हैं तो यह संकेत है कि आप आगे बढे। अंकशास्त्र में संख्या 1234 संख्याओं का आरोही क्रम है जो यह बताता हैं कि अब विकास और परिवर्तन का समय है। अंकशास्त्र में इस का जोड यानि 1+2+3+4=10=1आता है जो एक नई शुरुआत का प्रतीक है। यह आप को बताता है कि आप आगे बढे।नई राह आप की इंतजार कर रही है। पिछली यादों के भंवर जाल से निकले जो बीत गया है वह वापस नहीं आयेगा। नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव में न रहे सकारात्मक बने। एक नया अध्याय आप के जीवन में शुरू हो रहा है। अगर आप आध्यात्म की राह पर है तो आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी यह नंबर बहुत शक्तिशाली है। यह अंक आप को बता रहा है कि आप सही राह पर चल रहे हैं। अपने अंतरात्मा की आवाज को सुने और आगे बढते रहे। भगवान आप के साथ है।
श्री सतगुरु महाराज जी को कोटि कोटि प्रणाम. क्या समर्पण करुँ मेरा तो कुछ भी नही,जो कुछ है वो आप ही का है,आप ही का आप को अर्पण मेरे प्रभु...
बुधवार, 9 मार्च 2022
बुधवार, 22 सितंबर 2021
इंद्र का ब्रह्महत्या दोष
शनिवार, 11 सितंबर 2021
शिवलिंग क्या है
प्रलय काल में सृष्टि को अपने में समाहित कर लेने का नाम ही लिंग है। सृष्टि के कर्त्ता देवों के देव महादेव जी हैं और महादेवी उनकी शक्ति हैं। शिव जी का पूरा परिवार शिवलिंग में ही विराजमान है। जो ऊपर लिंग है वह शिवजी का स्वरुप है और वेदी माता पार्वती जी हैं। और जहां से पानी गिरता है एक और गणेश दूसरी और कार्तिकेय जी का स्थान है। बीच का स्थान उनकी पुत्री अशोक सुंदरी का है इसलिए जब हम शिवलिंग पर जल की धार अर्पित करते हैं तो संपूर्ण शिव परिवार को जल अर्पित हो जाता है। हर हर महादेव 🙏
मंगलवार, 13 अप्रैल 2021
विक्रम संवत 2078
विक्रम संवत 2078 का आरंभ मंगलवार से हो रहा है तो इस साल के राजा मंगलदेव और मेष संक्राति भी है तो मंत्री भी मंगलदेव होगे। नवरात्रि का पहला दिन जो वार होता है उससे माँ दुर्गा के वाहन का पता चलता है। मंगलवार के दिन होने पर देवी का वाहन घोड़ा है इसलिए इस बार माँ दुर्गा घोड़े पर सवार होकर धरती पर आई है। जिस से युद्ध की आशंका रहती है। पर जाते समय उनका वाहन हाथी है। जो खेती के लिए शुभ है तथा साथ ही ज्यादा वर्षा के योग भी बनते हैं।
चित्र---गूगल साभार
शुक्रवार, 1 जनवरी 2021
कामाख्या शक्तिपीठ
कामाख्या शक्तिपीठ असम राज्य के गुवाहाटी के पश्चिम में 8 किलोमीटर दूर नीलांचल पर्वत पर स्थित है। कामाख्या मंदिर जो 51 महाशक्ति पीठो मे से एक है। यहां सती माता का योनि अंग गिरा था इसलिए इसे योनिपीठ भी कहा जाता है। कामाख्या मंदिर में प्रवेश करते ही एक बहुत बड़ा हॉल है।उस हॉल के बीच में हरगौरी के रुप में कामेश्वर शिव-कामेश्वरी देवी की युगल मूर्ति स्थापित है। सीढ़ियां उतर कर गर्भगृह है। कामाख्या योनि पीठ से निरंतर जल बहता रहता है। यह जल कहाँ से आता है और कहाँ जाता है, यह एक रहस्य है।
गर्भगृह में देवी माता की योनि रूपा शिला विद्यमान है, जो वस्त्र से ढकी रहती है और उस के सामने दीपक जलता रहता है। शक्ति पीठ की रक्षा के लिए उन से संबंधित एक भैरव होते हैं। भैरव को शिव का ही रूप माना जाता है। भैरव जो पीठ की रक्षा करते हैं उन्हें क्षेत्रपाल भी कहा जाता है। कामाख्या मंदिर के भैरवजी उमानन्द जी है। इन के दर्शन करने पर ही कामाख्या मंदिर की यात्रा पूरी मानी जाती है। कामाख्या देवी के मंदिर के निकट एक कुंड है।जिसे सौभाग्य कुण्ड कहा जाता है। कुंड का पानी लाल रंग का है। कुंड के पास ही गणेश जी का मंदिर है। इन का दर्शन करना भी जरूरी होता है।जब आषाढ़ मास में सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करता है तो उस समय पृथ्वी ऋतुमति होती है।इस समय को अम्बुवाची पर्व कहते है। यहां हर साल इस समय अम्बुवाची मेला लगता है। उस दौरान पास में स्थित ब्रह्मपुत्र का पानी तीन दिन के लिए लाल हो जाता है। कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण पानी का रंग लाल हो जाता है।माना जाता है कि जब मां तीन दिन की रजस्वला होती है तो सफेद रंग का कपडा मंदिर के अंदर बिछा दिया जाता है। चौथे दिन ब्रह्म मुहूर्त में देवी को स्नान करवाकर श्रृंगार के उपरान्त ही मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला जाता है। तीन या चार दिन बाद जब मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं, तब वह वस्त्र माता के रज से लाल रंग से भीगा होता है। इस भीगे कपड़ें को अम्बुवाची वस्त्र कहते है। इसे ही भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।
तंत्र साधना के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण जगह मानी जाती है।ऐसा माना जाता है कि उच्च कोटि के तंत्र साधक इस अवसर पर सूक्ष्म शरीर द्वारा माता के दर्शनों के लिए आते हैं। कामाख्या में अम्बुवाची पर्व के अलावा दो उत्सव और मनाए जाते हैं।पहला देवध्वनि उत्सव, इसमें वाद्ययंत्रों के साथ नृत्य किया जाता है और दूसरा हर-गौरी विवाह। पौष माह के कृष्ण पक्ष में पुष्य नक्षत्र में यह उत्सव मनाया जाता है, जिसमें कामेश्वर की चल मूर्ति को कामेश्वर मंदिर में प्रतिष्ठित किया जाता है। दूसरे दिन देवी के मंदिर में दोनों मूर्तियों का हर-गौरी विवाह का उत्सव मनाया जाता है।
रविवार, 18 अक्टूबर 2020
असली रहस्य जन्म मरण का..
बुधवार, 30 सितंबर 2020
अंको का खेल
शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020
श्री शिवाष्टक स्तोत्र
श्री शिवाष्टक स्त्रोत्र
जय शिवशंकर, जय गंगाधर, करुणा-कर करतार हरे,
जय कैलाशी, जय अविनाशी, सुखराशि, सुख-सार हरे
जय शशि-शेखर, जय डमरू-धर जय-जय प्रेमागार हरे,
जय त्रिपुरारी, जय मदहारी, अमित अनन्त अपार हरे,
निर्गुण जय जय, सगुण अनामय, निराकार साकार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥
जय रामेश्वर, जय नागेश्वर वैद्यनाथ, केदार हरे,
मल्लिकार्जुन, सोमनाथ, जय, महाकाल ओंकार हरे,
त्र्यम्बकेश्वर, जय घुश्मेश्वर भीमेश्वर जगतार हरे,
काशी-पति, श्री विश्वनाथ जय मंगलमय अघहार हरे,
नील-कण्ठ जय, भूतनाथ जय, मृत्युंजय अविकार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥
जय महेश जय जय भवेश, जय आदिदेव महादेव विभो,
किस मुख से हे गुणातीत प्रभु! तव अपार गुण वर्णन हो,
जय भवकारक, तारक, हारक पातक-दारक शिव शम्भो,
दीन दुःख हर सर्व सुखाकर, प्रेम सुधाकर की जय हो,
पार लगा दो भव सागर से, बनकर करूणाधार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥
जय मनभावन, जय अतिपावन, शोकनशावन,शिव शम्भो
विपद विदारन, अधम उदारन, सत्य सनातन शिव शम्भो,
सहज वचन हर जलज नयनवर धवल-वरन-तन शिव शम्भो,
मदन-कदन-कर पाप हरन-हर, चरन-मनन, धन शिव शम्भो,
विवसन, विश्वरूप, प्रलयंकर, जग के मूलाधार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥
भोलानाथ कृपालु दयामय, औढरदानी शिव योगी,
सरल हृदय,अतिकरुणा सागर, अकथ-कहानी शिव योगी,
निमिष मात्र में देते हैं,नवनिधि मन मानी शिव योगी,
भक्तों पर सर्वस्व लुटाकर, बने मसानी शिव योगी,
स्वयम् अकिंचन,जनमनरंजन पर शिव परम उदार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥
आशुतोष! इस मोह-मयी निद्रा से मुझे जगा देना,
विषम-वेदना, से विषयों की मायाधीश छुड़ा देना,
रूप सुधा की एक बूँद से जीवन मुक्त बना देना,
दिव्य-ज्ञान- भंडार-युगल-चरणों को लगन लगा देना,
एक बार इस मन मंदिर में कीजे पद-संचार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥
दानी हो, दो भिक्षा में अपनी अनपायनि भक्ति प्रभो,
शक्तिमान हो, दो अविचल निष्काम प्रेम की शक्ति प्रभो,
त्यागी हो, दो इस असार-संसार से पूर्ण विरक्ति प्रभो,
परमपिता हो, दो तुम अपने चरणों में अनुरक्ति प्रभो,
स्वामी हो निज सेवक की सुन लेना करुणा पुकार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥
तुम बिन व्याकुल हूँ प्राणेश्वर, आ जाओ भगवन्त हरे,
चरण शरण की बाँह गहो, हे उमारमण प्रियकन्त हरे,
विरह व्यथित हूँ दीन दुःखी हूँ दीन दयालु अनन्त हरे,
आओ तुम मेरे हो जाओ, आ जाओ श्रीमंत हरे,
मेरी इस दयनीय दशा पर कुछ तो करो विचार हरे।
सोमवार, 20 अगस्त 2018
उत्तर दिशा में क्यों नहीं सोए?
प्रकृति मे अनन्त शक्ति विद्यमान है।उस में से एक चुम्बकीय शक्ति भी है। ग्रह, नक्षत्र, तारे एक दूसरे से चुम्बकीय तरंगों से जुड़े हुए हैं। चुम्बक के आकर्षण और विकर्षक से ही यह पूरा ब्रह्मांड गतिशील है। हमारे शरीर से निकलने वाली ऊर्जा इन चुम्बकीय तरंगों से प्रभावित होती है।पृथ्वी के दो ध्रुव - उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिण ध्रुव के बीच इन चुम्बकीय तरंगों का प्रवाह होता रहता है। हमारे शरीर पर इन तरंगों का सकारात्मक प्रभाव पडे, इसके लिए हमें सोने के लिए सही दिशा का ज्ञान होना चाहिए क्योंकि सोते समय हम पृथ्वी की चुम्बकीय शक्ति से जुड जाते हैं। उत्तर दिशा में सिर रखकर सोने से हमारे शरीर में रक्त के प्रवाह पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। जिस से हम सुबह तरो ताजा नहीं रह पाते। बार-बार उत्तर दिशा में सिर रखकर सोने से हमे सिर दर्द, रक्त की कमी, तथा अन्य मस्तिष्क संबंधी बीमारियाँ भी हो सकती है। ह्रदय संबंधित रोग भी हो सकते हैं। हमारी शारीरिक ऊर्जा धीरे धीरे कम होती जाती है क्योंकि विपरीत चुम्बकीय खिंचाव आपके दिमाग पर दबाव डालेगा, जिससे शरीर सुस्त और आप की नाड़ी की गति धीमी हो सकती है। अगर आप की उम्र ज्यादा है तो लगातार इस दिशा में सोने से लकवा भी हो सकता है। अतः पृथ्वी की सकारात्मक तरंगो का प्रभाव सोते समय हमारे शरीर पर पडे तथा शरीर स्वस्थ रहें, उस के लिए हमें उत्तर दिशा में सिर रखकर नहीं सोना चाहिए। पूर्व दिशा में सिर रखकर सोने से सात्विक तरंगे हमारे ब्रह्मरंध द्वारा हमारे शरीर में पहुंच कर हमें शारीरिक शक्ति तथा कुंडलिनी खोलने मे सहायक होती है इसलिए जो आध्यात्मिक ऊर्जा को बढाना चाहते हैं उन्हें पूर्व दिशा की ओर सोना चाहिए। पढने वाले बच्चों को भी इस दिशा में सोना चाहिए ताकि उनके मस्तिष्क का पूर्ण विकास हो पाए। दक्षिण दिशा में सोना उन लोगों के लिए लाभदायक होता है जिन्हें मानसिक तनाव ज्यादा रहता है। जिन बच्चों की लम्बाई अपनी उम्र के हिसाब से नहीं बढ़ रही हो उन्हें भी दक्षिण दिशा में सिर रखकर सोना चाहिए।
चित्र गूगल साभार
गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018
स्वप्न ज्ञान
स्वप्नों का भी बडा विचित्र इतिहास है। हर सपने का भिन्न - भिन्न अर्थ होता है। ज्योतिष शास्त्र, तंत्र शास्त्र में भी स्वप्नों के विषय में काफी जानकारी दी गई है। मंत्रों द्वारा भी साधक को स्वप्नों द्वारा जानकारी मिल जाती है जिससे उसे भूत भविष्य वर्तमान की जानकारी मिलती रहती है।
हर स्वप्न का अर्थ भिन्न - भिन्न होता है परंतु एक ही वस्तु के भिन्न - भिन्न अर्थ हो सकते है। कई बार हम स्वप्न मे कई चीजें एक साथ देखते हैं जिससे उस स्वप्न का अर्थ नकारात्मक होते हुए भी सकारात्मक हो जाता है। जैसे स्वप्न में हम ने किन्नर को देखा तथा साथ में गणपति जी को भी देखा। स्वप्न में खाली किन्नर को देखना अच्छा नहीं होता है। किन्नर का जीवन अधूरापन लिए होता है। ये स्वप्न देखने वाले के जीवन में धन, मान सम्मान तथा सेक्स से संबंधित कमी को दर्शाता है। ज्योतिष शास्त्र में भी बुध ग्रह को मजबूत करने के लिए किन्नर को कुछ दान करने के लिए कहा जाता है। अब स्वप्न में किन्नर के साथ - साथ गणपति जी को देखना नकारात्मक का प्रभाव सकारात्मक में बदल जाता है। गणपति को देखना शुभ संकेत है। भविष्य में उन्नति, सुख संपत्ति, तथा मंगल कार्य का संकेत देता है। दोनों का स्वप्न में आना हमे यह दर्शाता है कि अगर आप के जीवन में जो अधूरापन है तो वह समाप्त हो जायेगा। धन, मान-सम्मान, तथा वैवाहिक जीवन का सुख प्राप्त होने का संकेत है।
इस प्रकार से स्वप्नों के जरिए हमे सटीक फल का मूल्यांकन करना चाहिए।
चित्र गूगल साभार
मंगलवार, 30 जनवरी 2018
चंद्र ग्रहण 2018
माघ पूर्णिमा 31 जनवरी 2018 को है। इस दिन पूर्ण चंद्रग्रहण भी है।चंद्र ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी आती है। 31 जनवरी 2018 को चंद्रमा एक अलग रूप में दिखाई देगा जिस के कारण इसे सुपर ब्लू मून कहा गया है। जो शाम 5.58 मिनट पर शुरू होगा और रात 8.41 तक रहेगा।ग्रहण के समय सिंह लग्न उदय हो रहा है और चंद्रमा कर्क राशि में स्थित है। जो कि एक जलीय राशि है। जिस के कारण वर्षा तथा समुद्री तूफान की भी संभावना रहेगी। चंद्रमा पर ग्रहण के समय शुक्र और बुध की दृष्टि भी पड़ रही है जिसके कारण शेयर बाजार,होटल व्यवसाय, बैंकिंग, रेलवे, कपड़े के काम तथा सोने चांदी के काम करने वालों को लाभ मिलेगा। ग्रहण के समय चंद्रमा 12भाव में होने से विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए नए योजनाओं की भी संभावना दिख रही है। किसानों के लिए भी यह ग्रहण अच्छा है क्योंकि सामान्य वर्षा उनकी फसल की बुआई के लिए अच्छा रहेगा। यह ग्रहण भारत के अलावा नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, कोरिया, रूस, चीन, पाकिस्तान, थाईलैंड आदि देशों में भी दिखाई देगा।
चित्र गूगल साभार
गुरुवार, 21 दिसंबर 2017
अंक 13
13 अंक 1 और 3 की शक्तियों का एक प्राकृतिक संयोजन है। अंक 1 नई शुरुआत का, आगे बढ़ाने का, तथा पूर्णता को दर्शाता है।ये अंक जीवन में अपने उद्देश्यों के बारे में सकारात्मक भावनाओं को रखने के बारे में बताता है ताकि आप अपने लक्ष्य को हासिल कर पाये। निराशावादी दृष्टिकोण आपके लक्ष्य को पूरा करने की संभावनाओं को पूरा नष्ट कर देता है जबकि 3 अंक की संख्या विकास, मौलिकता तथा भौतिकता के अतिरिक्त गुण को प्रदर्शित करता हैं।जब ये संख्या आप को बार-बार दिखाई दे या सपने मे ये संख्या आप को दिखाई दे तो यह संख्या आपको यह बता रही है कि आप अपने सहज ज्ञान और अंर्तदृष्टि को पहचाने। यह अपने आप को प्रदर्शित करने का अंक हैं।
13 अंक स्त्रीलिंग अंक हैं। ये अंक एक परिवर्तन का प्रतीक है। ये अंक आप को बताता है कि आप की जिंदगी में कुछ उतार चढ़ाव आने वाले हैं जोकि आप के कर्म के प्रभाव से हो रहा है। यह अंक अशुभ नहीं है, जितना की इसे माना जाता है। यह अंक दर्शाता है कि ईश्वरीय स्त्री की ऊर्जा आपके साथ हैं और आप की सहायता कर रही है। बस आप अपना हर कदम बिना किसी डर के सकारात्मक सोच के साथ रखे। ईश्वर का छुपा हुआ आशीर्वाद आप को प्राप्त होगा। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी ये शुभ संदेश दे रहा है। आत्मा परमात्मा के मिलन मे आप के लिए एक नया मार्ग तैयार हो रहा है। अगर आप किसी प्रकार से भ्रमित हो रहे हैं तो आप अपने गुरु से सहायता तथा मार्गदर्शन प्राप्त करे।
चित्र
गूगल साभार
शनिवार, 22 जुलाई 2017
पंचमुखी हनुमान
शुक्रवार, 7 जुलाई 2017
सावन सोमवार का महत्व
गुरू पूर्णिमा पर गुरू की आराधना के बाद श्रद्धालु एक माह के लिए गुरूओं के गुरू भगवान शिव की पूजा मे लीन हो जायेगें गुरू पूर्णिमा ९ जुलाई की है और भगवान शिव का महीना माना जाने वाला सावन १० जुलाई से शुरू हो रहा है २७ बर्ष बाद एैसा संयोग बना है कि इस बार सावन भगवान शिव के दिन सोमवार को शुरू होगा और इसका समापन भी सोमवार को ही होगा १९९० में एैसा संयोग बना था इसे इन्दुवार हर्षण योग कहते है पूरे माह में इस बर्ष पांच सोमवार पड़ेगे इस बर्ष सावन माह में सोमवार व्रत का पुण्य हजारो गुना अधिक होगा और व्रती पर भगवान शिव की अक्षय कृपा बनी रहेगी।
पहला सोमवार-
दस जुलाई को सावन का पहला सोमवार है इस दिन उतराषाढ़ नक्षत्र और वैधृति योग है दिन के स्वामी चन्द्रमा पर देवगुरू वृहस्पति की पूर्ण दृष्टि है इसलिए इस दिन का व्रत ज्ञान वृद्धि के लिए सर्वोत्तम है इस दिन ब्रत करने से व्यापारिक कार्यो में भी समृद्धि का योग प्राप्त होगा।
दूसरा सोमवार-
दूसरा सोमवार सत्रह जुलाई को पड़ेगा इस दिन अष्टमी तिथि अश्विनी नक्षत्र और धृति योग है स्वामी चन्द्रमा राज्य स्थान मे है इस दिन का ब्रत राज्कीय कार्यो में सफलता दिलाएगा।
तीसरा सोमवार-
तीसरा सोमवार चौबिस जुलाई को है इस दिन प्रतिप्रदा तिथि पुण्य नक्षत्र और सिद्धि योग है इस दिन का ब्रत दिन के स्वामी चन्द्रमा केंद्रगत शरीर पर होने से अरोग्ता व वंश वृद्धि के लिए उत्तम रहेगा।
चौथा सोमवार-
चौथा सोमवार ३१ जुलाई को है इस दिन अष्टमी तिथि स्वाती नक्षत्र और शुभ योग है दिन के स्वामी चन्द्रमा के भूमि,भवन व सुख के स्थान पर से दिन के ब्रत से भूमि,भवन व भौतिक सुख की प्राप्ति के योग है।
पांचवा सोमवार-
सावन माह का पांचवा व अन्तिम सोमवार सात अगस्त को है इस दिन पूर्णिमा तिथि,श्रवण नक्षत्र और आयुष्मान योग है दिन का स्वामी चंन्द्रमा के सप्तम स्थानंगत होने से विवाह के योग बनेगे और दामपत्य जीवन में मधुरता व सुख का प्रवेश होगा।।
सोमवार, 27 जुलाई 2015
कृत्तिका नक्षत्र
कृत्तिका नक्षत्र सात तारो का एक झुंड है।वास्तव मे यह अंगूरों का गुच्छा प्रतीत होता है। कृत्तिका नक्षत्र का प्रथम चरण मेष तथा शेष तीन चरण वृष राशि में है।कार्तिक मास की पूर्णिमा को चंद्रमा कृत्तिका नक्षत्र में रहता है । इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य तथा देव अग्नि है। यह नक्षत्र सतोगुणी की श्रेणी मे आता है। इस नक्षत्र मे सामान्य व अग्नि संबधी कार्य सिद्ध होते है। इस नक्षत्र मे कोई वस्तु खोने पर न तो उस वस्तु का सुराग लगता है और न ही वह वस्तु मिल पाती है ।
शुक्रवार, 26 जून 2015
प्रदोष व्रत
यह व्रत सर्वकार्य सिद्धि व पापो को नाश करने वाला है। प्रदोष का अर्थ रात का शुभांरभ होता है।सूर्यास्त होने के बाद जब संध्याकाल होता है तो रात के शुरू होने की पूर्व बेला को ही प्रदोषकाल कहते है। प्रत्येक मास की त्रयोदशी तिथि को जो दिन होता है उसी दिन के नाम के अनुसार प्रदोष व्रत मानते है। हर प्रदोष व्रत के फल अलग-अलग होते है।














